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Transformer in Hindi : ट्रांसफार्मर क्या है तथा यह कैसे कार्य करता है?

आज के समय में मौजूद ऊर्जा के सभी रूपों में इंसान विधुत ऊर्जा का उपयोग अन्य रूपों के अपेक्षा कुछ ज्यादा ही कर रहा है। ऊर्जा का यह प्रकार इतना पॉपुलर है की इंसान ऊर्जा के अन्य रूप को विधुत ऊर्जा में परिवर्तित कर इसका उपयोग कर रहा है।
Transformer in hindi
 विधुत ऊर्जा,ऊर्जा के अन्य रूप से ज्यादा फायदेमंद है। विधुत ऊर्जा के उत्पादन से लेकर उपयोग तक के प्रक्रिया में एक स्पेशल प्रकार के मशीन का उपयोग किया जाता है जिसे ट्रांसफार्मर कहा जाता है। मैं इस लेख के माध्यम से ट्रांसफार्मर से सम्बंधित जानकारिया आप लोगो के साथ साझा करने जा रहा हु। 

यदि  ट्रांसफार्मर से सम्बंधित जानकारी पहले से है तो अच्छी बात है अगर आप ट्रांसफार्मर के बारे में नहीं जानते है तो इस लेख को अंत तक पढ़े। ट्रांसफार्मर के कुंडली  शुरुवात हैं इसके परिभाषा  से करते है। 

ट्रांसफार्मर क्या है?(What is Transformer in Hindi?) 

ट्रांसफार्मर  एक प्रकार का इलेक्ट्रिकल मशीन होता है जो विधुत ऊर्जा को इसके Voltage level में परिवर्तन के साथ एक सर्किट से दूसरे सर्किट में ट्रांसफर करता है। इस ऊर्जा ट्रांसफर में विधुत ऊर्जा के फ्रीक्वेंसी में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता है। ट्रांसफार्मर में विधुत ऊर्जा का एक सर्किट से दूसरे सर्किट में ट्रांसफर एक चुम्बकीय क्षेत्र के उपस्थिति में होता है। बिना चुम्बकीय क्षेत्र के उपस्थिति विधुत ऊर्जा का ट्रांसफार्मर संभव नहीं है। 

 ट्रांसफार्मर का कार्य सिद्धांत क्या है? (Working Principle of Transformer)

ट्रांसफार्मर का कार्य सिद्धांत बहुत ही सरल है। यह दो या दो से अधिक Coil में उत्पन्न Mutual Induction सिद्धांत पर कार्य करता है। Mutual Induction सिद्धांत फैराडे के इलेक्ट्रो मैग्नेटिक सिद्धांत को ही कहते है। 

इस सिद्धांत के अनुसार किसी विधुत परिपथ में यदि एक प्रत्यावर्ती विधुत धारा (Alternating Current या AC) को आरोपित किया जाये तो उसमे एक  प्रत्यावर्ती प्रकृति का ही चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है जब यह चुम्बकीय क्षेत्र किसी दूसरे परिपथ के संपर्क में आता है तब उसमे भी प्रत्यावर्ती  प्रकृति का एक EMF अर्थात Voltage उत्पन्न कर देता है। 

ट्रांसफार्मर का प्रकार (Types of Transformer)

आज के परिवेश में बहुत प्रकार के ट्रांसफार्मर बनाये जा रहे है। आज ट्रांसफार्मर के उपयोग का दायरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। ट्रांसफार्मर को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है जैसे :-
संरचना के आधार पर 
(1) Core Type Transformer (2) Shell Type Transformer  
Phase  के आधार पर 
(1) Single Phase Transformer (2) Three Phase Transformer  
कार्य करने  के आधार पर 
(1) Step Up Transformer (2) Step Down Transformer
Instrument में उपयोग के आधार पर 
(1) Current Transformer (2) Potential Transformer

ट्रांसफार्मर के भाग (Part of the transformer)
ट्रांसफार्मर के मुख्य भाग है :-

  • प्राइमरी वाइंडिंग 
  • सेकेंडरी वाइंडिंग 
  • मैग्नेटिक कोर
Transformer In Hindi
ट्रांसफार्मर 


प्राइमरी वाइंडिंग 

यह ट्रांसफार्मर का पहला भाग होता है जिसमे बाहरी श्रोत से विधुत ऊर्जा को ट्रांसफार्मर से जोड़ा जाता है। यह ट्रांसफार्मर के लिए इनपुट की तरह कार्य करता है।  ट्रांसफार्मर में Magnetic फ्लक्स प्राइमरी वाइंडिंग में ही उत्पन्न होता है। 


सेकेंडरी वाइंडिंग 


यह ट्रांसफार्मर में कोर के दूसरे साइड में जुड़ा हुआ होता है। सेकेंडरी वाइंडिंग ट्रांसफार्मर में output की तरह कार्य करता है। प्राइमरी वाइंडिंग में उत्पन्न मैग्नेटिक फ्लक्स मैग्नेटिक कोर से होते हुए जब सेकेंडरी वाइंडिंग से लिंक होता है तब इसमें EMF उत्पन्न होता है। जब सेकेंडरी वाइंडिंग से किसी दूसरे सर्किट को जोड़ा जाता है तब उसमे विधुत धारा का परवाह होने लगता है। 


मैग्नेटिक कोर 


यह एक प्रकार के हाई ग्रेड सिलिकॉन तथा आयरन का बना हुआ कोर होता है जिसका मुख्य कार्य प्राइमरी वाइंडिंग में उत्पन्न हुए Magnetic फ्लक्स को एक Low Reluctance का रास्ता तैयार करना जिससे यह बिना किसी हानि के सेकेंडरी वाइंडिंग से लिंकि हो सके। अर्थात यह चुम्बकीय फ्लक्स के लिए एक बंद चुम्बकीय पाश बनाता है। 

ट्रांसफार्मर कैसे कार्य करता है?

जब ट्रांसफार्मर के प्राइमरी को किसी Alternating Current श्रोत से जोड़ा जाता तब प्राइमरी वाइंडिंग में एक Alternating Current का परवाह होने लगता है। विधुत धारा के चुम्बकीय प्रभाव के कारण प्राइमरी वाइंडिंग में भी एक Alternating प्रकृति का एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है जब यह ट्रांसफार्मर के कोर से लिंक होता है तब यह मैग्नेटिक फ्लक्स कहलाता है। 
यह चुम्बकीय फ्लक्स कोर से होते हुए जब सेकेंडरी वाइंडिंग से लिंक करता है तब उसमे एक EMF को Induce कर देता है। सेकेंडरी में उत्पन्न हुए EMF का परिमाण सेकण्ड्री वाइंडिंग में लगे Coil के टर्न संख्या पर निर्भर करता है।

यदि प्राइमरी वाइंडिंग के Coil के टर्न सख्या सेकेंडरी वाइंडिंग के टर्न संख्या से कम हुआ तो सेकण्ड्री वाइंडिंग में उत्पन्न हुए EMF का परिमाण ,प्राइमरी वाइंडिंग पर लगाए गए वोल्टेज के परिमाण से ज्यादा होगा और इस प्रकार के ट्रांसफार्मर को Step Up ट्रांसफार्मर कहते है। 

इसके विपरीत यदि सेकण्ड्री वाइंडिंग की टर्न संख्या प्राइमरी वाइंडिंग के टर्न संख्या से कम हुयी तब सेकेंडरी में उत्पन्न हुए EMF का परिमाण, प्राइमरी वाइंडिंग पर आरोपित वोल्टेज के परिमाण से कम होगा और इस प्रकार के ट्रांसफार्मर को Step Down ट्रांसफार्मर कहते है।   

ट्रांसफार्मर का उपयोग (Application of Transformer)

ट्रांसफार्मर का उपयोग विधुत परिपथ में बहुत तरह के कार्य करने के लिए उपयोग किया जाता है। लेकिन ज्यादातर सर्किट में यह Voltage को घटाने या बढ़ाने के लिए ही उपयोग किया जाता है। इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में ट्रांसफार्मर का उपयोग बहुत किया जाता है। पावर सिस्टम में उपयोग किया जाने वाला ट्रांसफार्मर Step Up या Step Down ट्रांसफार्मर होता है।    


चूँकि हमें मालूम है की विधुत ऊर्जा का उत्पादन उपयोग क्षेत्र से सुदूर होता है तथा उत्पादित विधुत ऊर्जा का Voltage Level बहुत कम होता है। हम यह भी जानते है कि ऊर्जा को कम वोल्टेज पर एक जगह से दूसरे जगह पर स्थान्तरित करने के लिए मोटे चालक (Wire) की जरुरत होती है। यदि ट्रांसमिशन लाइन में मोटे चालक  उपयोग किया जाये तो खर्चा बढ़ जायेगा। 

इसके विपरीत अगर हाई वोल्टेज पर विधुत ऊर्जा को स्थान्तरित करे तो यह काम आसानी से पतले चालक से हो जायेगा। इसी कारण Power Plant में उत्पादित विधुत ऊर्जा का वोल्टेज लेवल को पहले Step Up Transformer के मदद से Step Up किया जाता है तत्पश्चात उसे ट्रांसमिशन लाइन के मदद से उपयोग करने वाले स्थान पर भेजा जाता है।   

उपयोग स्थान पर विधुत ऊर्जा का उपयोग कम वोल्टेज लेवल पर होता है इसके लिए पुनः Step Down ट्रांसफार्मर का उपयोग कर वोल्टेज लेवल को कम किया जाता है। 

ट्रांसफार्मर से सम्बंधित प्रश्न 
स्टेप अप ट्रांसफार्मर क्या होता है?
यह एक ऐसा ट्रांसफार्मर होता है जो Low Voltage को High Voltage में बदलता है। 

Step Down  ट्रांसफार्मर क्या होता है ?
यह एक ऐसा ट्रांसफार्मर होता है जो High Voltage को Low Voltage में बदलता है।

ट्रांसफार्मर का उपयोग DC वोल्टेज पर क्यों नहीं किया जाता है?
DC वोल्टेज आरोपित करने से प्राइमरी वाइंडिंग में स्थैतिक मैग्नेटिक मैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न होगा जिससे सेकेंडरी में किसी भी प्रकार का EMF induced नहीं होगा।  

ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
ट्रांसफार्मर म्यूच्यूअल इंडक्शन सिद्धांत पर कार्य करता है। 

करंट ट्रांसफार्मर क्या होता है?
यह एक इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर होता जिसका उपयोग हाई वोल्टेज पर विधुत धारा मापने के लिए किया जाता है।

ट्रांसफार्मर का उपयोग क्यों किया जाता है?
ट्रांसफार्मर का उपयोग AC वोल्टेज लेवल को बढ़ाने या घटाने के लिए किया जाता है। 
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