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Difference Between AC and DC in Hindi - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

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बहुत ऐसे लोग है जो AC तथा DC में अंतर नहीं समझ पाते है। यदि आप भी उन्ही लोगो में से एक है तो आपको इस पोस्ट को पूरी पढ़नी चाहिए। आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से आसान भाषा में AC तथा DC  बीच में अंतर स्पस्ट करेंगे।
AC का मतलब होता है Alternating Current यानी प्रत्यावर्ती धारा। एक ऐसी विधुत धारा जिसका मान समय के साथ बदलता रहता है। Alternating नेचर का या तो करंट  हो सकता या वोल्टेज। 
यदि Alternating Current या Alternating Voltage  का मान एक नियत समय अंतराल के बाद दुहराता (Repeat) है तो इस समय अंतराल को आवर्त काल (Time Period) कहते है।

Generally Alternating करंट या वोल्टेज को एक तरंग रूप (Wave form) में दिखाया जाता है और इस Wave form में इसका मान आवर्त काल के आधे  समय के लिए धनात्मक दिशा में बढ़ता और फिर घटता  है और फिर दूसरे आधे समय में ऋणात्मक दिशा में बढ़ता है और दुबारा घटता है। जैसा  निचे दिखाया गया है। Alternating Current तथा Voltage का Wave Form Sine wave ,Cosine Wave ,Triangular Wave or Square Wave कुछ  भी हो सकता है। 
AC Current
Sine Wave Form 

Alternating Current या Voltage एक सेकंड में जितनी बार अपने Value को दुहराता (repeat) है। उसे ही आवृति (frequency) कहते है। आवृति को हर्ट्ज में मापा जाता है।यदि किसी alternating वोल्टेज की frequency 100 Hz है इसका मतलब हुआ की यह वोल्टेज अपने आपको एक सेकंड में 100 बार रिपीट कर रहा  है। 
DC मतलब होता है Direct Current  यानी एक ऐसा करंट  है जिसका मान  समय के साथ बदले न ,हमेशा नियत (Constant) रहे। DC Voltage  या DC Current  का मान हमेशा नियत (Constant) रहता है।  चूँकि DC  मान बदलता नहीं है इसलिए इसकी आवृति (frequency) हमेशा शून्य रहता है।

AC तथा DC का उत्पादन कैसे किया जाता है?

AC तथा DC विधुत धारा उत्पन्न करने के लिए एक विशेष प्रकार के मशीन का प्रयोग किया जाता है। जिसे जनरेटर कहते है। जनरेटर मुख्य रूप से AC विधुत धारा ही उत्पन्न करता है। जनरेटर द्वारा उत्पन्न हुये AC को Rectifier के मदद से DC में परिवर्तित किया जाता है। AC को DC में बदलने की प्रक्रिया रेक्टिफिकेशन कहलाती है। 
जनरेटर के अतिरिक्त DC विधुत धारा को  सोलर सेल द्वारा भी उत्पन्न किया जाता है। बहुत ज्यादा मात्रा में विधुत ऊर्जा उत्पन्न करने ,बहुत से सोलर से को आपस में सीरीज तथा पैरेलल में जोड़कर सोलर प्लेट का निर्माण किया जाता है। 

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