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डीसी मशीन (मोटर तथा जनरेटर) में होने वाली विभिन्न प्रकार की उर्जा हानि- हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

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 डीसी मशीन क्या होता है?

डीसी मोटर तथा डीसी जनरेटर को सम्मिलित रूप से डीसी मशीन कहा जाता है। डीसी मोटर तथा डीसी जनरेटर के कार्य सिद्धांत तथा बनावट में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं होता है। इन दोनों में मात्रा उर्जा प्रवाह का अंतर होता है। एक डीसी मशीन में यदि विधुत धारा को प्रवाहित किया जाए तब यह मोटर कहलाता है। इसके विपरीत यदि डीसी मशीन के शाफ़्ट को किसी तरीके से घुमाया जाए तब उससे विधुत धारा बाहर निकलने लगती है। जब मशीन से विधुत धारा बाहर निकलने लगती है तब उसे डीसी जनरेटर कहते है। दोनों प्रकार के मशीन में समानता होने की वजह से इनका सम्मिलित रूप से अध्ययन किया जाता है। 

डीसी मशीन में उर्जा हानि क्या होता है?

डीसी मशीन को दी जाने वाली उर्जा तथा उससे प्राप्त उर्जा के अंतर को उर्जा हानि कहते है। डीसी मशीन में प्रवाहित उर्जा का कुछ भाग उसके आंतरिक भाग में स्थित (जैसे Coil , कोर ) में खर्च हो जाता है जिससे मशीन गर्म हो जाता है। खर्च होने के बाद उर्जा का जो अंश बचता है वह मशीन से आउटपुट के रूप में प्राप्त होता है। डीसी मशीन में होने वाली उर्जा हानि को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है:-
  • इलेक्ट्रिकल या कॉपर लोस (Electrical or Copper Loss)
  • मैग्नेटिक या कोर लोस (Magnetic or Core Loss)
  • ब्रश लोस (Brush Loss)
  • यांत्रिक लोस (Mechanical Loss)
  • स्ट्रै लोस (Stray Loss)

कॉपर लोस क्या होता है?

इसे वाइंडिंग लोस भी कहा जाता है। यह वाइंडिंग के प्रतिरोध के वजह से होता है। जब मशीन के वाइंडिंग में विधुत धारा प्रवाहित किया जाता है तब इस प्रकार के विधुत लोस होता है। चूँकि मशीन के अंदर रोटर तथा स्टेटर में वाइंडिंग लगाई जाती है और इनमे डीसी विधुत धारा का प्रवाह होता है ,इसलिए दोनों में विधुत उर्जा का ह्रास होता है। यदि मशीन के आर्मेचर में प्रवाहित होने वाली विधुत धारा का परिमाण (Ia) तथा इसके वाइंडिंग का प्रतिरोध (Ra) हो तब इसमें होने वाली उर्जा लोस को निम्न तरीके से ज्ञात किया जाता है :
कॉपर लोस = Ia2Ra

मैग्नेटिक या कोर लोस क्या होता है?

चूँकि डीसी मशीन के अन्दर विधुत उर्जा का परिवर्तन यांत्रिक उर्जा या यांत्रिक उर्जा का परिवर्तन विधुत उर्जा में होता है। दोनों प्रकार के उर्जा परिवर्तन में चुम्बकीय क्षेत्र मौजूद रहता है। यदि स्टेटर तथा रोटर के बीच में चुंबकीय क्षेत्र मौजूद नहीं रहे तब उर्जा परिवर्तन नहीं होगा। स्टेटर तथा रोटर के बीच चुंबकीय क्षेत्र बनाये रखने के लिए विधुत उर्जा का कुछ भाग खर्च होते रहता है। इसी उर्जा को मैग्नेटिक या कोर लोस कहते है।  यह रोटर तथा स्टेटर के कोर में चुंबकीय क्षेत्र बनाये रखने में खर्च होता है। इसलिए इसे कोर लोस कहा जाता है। यह दो प्रकार का होता है :
(1) हिस्टैरिसीस लोस (Hysteresis Loss)
(2) एड्डी करंट लोस (Eddy Current Loss)

डीसी मशीन में ब्रश लोस क्या होता है?

यह एक सामान्य सा होने वाला विधुत ऊर्जा ह्रास है। यह कार्बन ब्रश तथा कम्यूटेटर के बीच होने वोल्टेज ड्राप के वजह से उत्पन्न होता है। सामान्यतः कार्बन वोल्टेज ड्राप को 2 वोल्ट माना जाता है। यह आर्मेचर में प्रवाहित होने वाली विधुत धारा तथा कार्बन वोल्टेज ड्राप के गुणनफल के बराबर होता है। छोटे मशीन में इसे इगनोरे कर दिया जाता है लेकिन बड़े मशीन में इसे इगनोरे नहीं किया जा सकता है।  यह मशीन के दक्षता (efficiency) को प्रभावित करता है। 

यांत्रिक लोस क्या होता है?

यांत्रिक प्रभाव के कारण होने वाली उर्जा ह्रास को यांत्रिक लोस कहते है। यह मशीन के यांत्रिक गति से सम्बंधित होता है। यह मशीन के बेअरिंग में घर्षण के कारण उत्पन्न होता है। यह उर्जा ह्रास मशीन के घूमने वाली भाग में उत्पन्न होता है। मशीन का हवा के संपर्क होकर घुमने से जो लोस उत्पन्न होता है उसे Windage लोस कहते है। 

स्ट्रै लोस (Stray Loss) क्या होता है?

यह विभिन्न प्रकार के उर्जा ह्रास का सम्मिलित रूप होता है। मशीन से सम्बंधित विभिन्न प्रकार की विधुत उर्जा ह्रास होती है जिसको ज्ञात करना बहुत ही मुश्किल होता है। मशीन को डिजाईन करते वक्त स्ट्रै लोस को कुल लोड का एक प्रतिशत मान लिया जाता है। स्ट्रै लोस को प्रभावित करने वाले करक निम्न है:
  • आर्मेचर रिएक्शन के कारण फ्लक्स में होने वाली डिस्टोर्शन से होने वाली विधुत उर्जा ह्रास 
  • commutation के वजह से होने वाली उर्जा ह्रास 

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