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Difference between Frequency and Time Period In Hindi - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

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आवर्त कल तथा आवृति में अंतर 

Time Period जिसे हिंदी में आवर्त काल तथा Frequency जिसे हिंदी में आवृति कहते है, तरंग (Wave) से संबंधित दो महत्वपूर्ण पैरामीटर है। Time Period तथा Frequency दोनों एक दुसरे के विपरीत अर्थ वाले पैरामीटर है। किसी तरंग के लिए एक पूर्ण Cycle पूरा करने में जो समय लगता है उसे Time Period अर्थात आवर्त काल कहा जाता है। इसके  विपरीत तरंग द्वारा एक सेकंड में लगाये गए पुरे चक्कर की संख्या(Number of Cycle) को frequency अर्थात आवृति कहते है। 

किसी माध्यम में उत्पन्न विक्षोभ (Disturbance) जो अपने साथ उर्जा तथा संवेग या इनमे से किसी एक को एक स्थान से दुसरे स्थान तक स्थांतरित (Transfer) करता है तब उसे तरंग (Wave) कहा जाता है। यदि कोई वस्तु किसी एक बिंदु के आगे पीछे एक निश्चित समय अंतराल के बाद अपने गति को दुहराती रहती है तब इस प्रकार के गति को आवर्त गति कहा जाता है। 

प्रत्येक प्रकार के तरंग (Wave) की गति आवर्त होती है। किसी तरंग की पूर्ण व्याख्या करने के लिए ,तरंग से सम्बंधित पैरामीटर जैसे आयाम (Amplitude),आवृति (Frequency),तरंग दैर्ध्य (Wavelength) ,आदि की जानकारी होना अति आवश्यक होता है। इन सभी पैरामीटर में आवृति तथा आवर्त काल दो ऐसे पैरामीटर है जिसमे लोग अंतर स्पष्ट रूप से समझ नहीं पाते है।

आवर्त काल की परिभाषा (Definition of Time Period )

आवर्त गति में घूम रही किसी वस्तु द्वारा एक चक्कर पूरा करने में जो समय लगता है उसे आवर्त काल कहा जाता है। इसे अंग्रेजी के बड़े अक्षर T द्वारा निर्देशित किया जाता है। इसका SI मात्रक सेकंड होता है।

जैसे सूर्य के चारो तरफ चक्कर लगाती पृथ्वी, आवर्त गति में घूम रही रही है और यह सूर्य का एक चक्कर पुरे एक वर्ष में पूरा करती है। इसलिए इसकी आवर्त काल एक साल होगा। अर्थात पृथ्वी के लिए आवर्त काल T = एक वर्ष = 365 दिन = 365x24x 60x60 सेकंड होगा।

यदि कोई वस्तु किसी वृताकार पथ पर घूम रही है और प्रत्येक 5 सेकंड में 10 चक्कर लगाती है। अतः वस्तु द्वारा एक चक्कर लगाने में लगा समय वस्तु का आवर्त काल होगा।
आवर्त काल = T
T = \frac{5}{10} s = 0.5 s
अतः वस्तु का आवर्त काल = 0.5 s है इसका मतलब हुआ की प्रत्येक 0.5 सेकंड के बाद वस्तु अपने गति को दुहरा (repeat) कर रही है।

आवृति की परिभाषा (Definition of Frequency)

आवर्त गति में घूम रही किसी वस्तु द्वारा एक सेकंड में लगाए गए कुल चक्करों की संख्या आवृति कहलाती है। । इसे अंग्रेजी के छोटे अक्षर f द्वारा निर्देशित किया जाता है। इसका SI मात्रक cycles प्रति सेकंड होता है। जिसे हर्ट्ज़ कहते है और इसे Hz लिखा जाता है।
जैसे की ऊपर की उदहारण में हमने देखा की वृताकार पथ पर घूम रही वस्तु प्रत्येक 5 सेकंड में वृताकार पथ का 10 चक्कर लगाती है। अतः यदि वस्तु की frequency f हो तब
f = (कुल चक्कर की संख्या) / (लगा हुआ समय)
f = \frac{10}{5} s = 2 Hz
अर्थात इसका मतलब हुआ की वस्तु प्रत्येक एक सेकंड में वृताकार पथ पर दो चक्कर लगा रही है। 

आवृति तथा आवर्त काल में संबंध 

तरंग के आवृति तथा आवर्त काल दोनों अलग अलग राशि है परन्तु इन दोनों एक दुसरे से संबंधित है। यदि आवर्त काल को T तथा आवृति को f द्वारा निर्देशित किया जाए तब इनके बीच के संबंध को निम्न तरीके से लिखा जा सकता है। 
T = \frac{1}{f}
या 
f = \frac{1}{T}
इन दोनों संबंध के मदद से किसी एक पैरामीटर के मदद से दुसरे को ज्ञात किया जा सकता है। जैसे यदि किसी वस्तु का आवर्त काल T = 0.2 सेकंड है तो इसकी आवृति ज्ञात कीजिये। 
इस प्रश्न में दिया गया है की आवर्त काल T = 0.2 सेकंड
माना की वस्तु की आवृति f है तब दिए गए दुसरे फार्मूला से 
f = \frac{1}{0.2} = 5 Hz

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