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धातु में विधुत धारा का प्रवाह कैसे होता है - इलेक्ट्रिकल डायरी

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धातु में विधुत धारा का प्रवाह कैसे होता है ?

धातुओं (Metals) में फ्री इलेक्ट्रान की संख्या बहुत ज्यादा होती है। ये फ्री इलेक्ट्रान किसी बंद बर्तन में भरी गैस की तरह व्यवहार करते है। इसलिए ही इनके समूह को इलेक्ट्रान गैस कहते है। ये फ्री इलेक्ट्रान धातु के अंदर स्थित बध्द धनायनों के बीच के रिक्त स्थानों (Intermolecular space) में तीव्र वेग (Velocity) से अनियमित गति (Irregular Motion)करते रहते है। फ्री इलेक्ट्रानो की ये गति केवल तापमान पर निर्भर करती है। अतः इसे thermal Velocity of free electron कहते है। फ्री इलेक्ट्रानो का यह तापीय वेग 105मीटर/सेकंड के बराबर होता है। 
तापीय वेग से घूमने वाले फ्री इलेक्ट्रान निरंतर धनायनों से टकराते रहते है जिसके कारण इन इलेक्ट्रानो की दिशा लगातार बदलती रहती है। इसी कारण सभी फ्री इलेक्ट्रानो की औसत वेग (Avergae Velocity) शून्य होता है। धातु के अंदर प्रति सेकंड में जितने इलेक्ट्रान किसी एक दिशा में प्रवाहित होते है औसतन उतने ही इलेक्ट्रान इसके विपरीत दिशा में प्रवाहित होते है। जिससे आवेशों का कुल औसत प्रवाह शून्य होता है जिससे चालक में विधुत धारा (Electric Current )प्रवाहित नहीं होती है। 

जब किसी चालक के दोनों सिरों के बीच कोई बैटरी जोड़ दी जाती है तो चालक के सिरों के बीच एक विभवांतर (Potential Difference) स्थापित हो जाता है जिससे चालक के अंदर प्रत्येक बिंदु पर एक विधुत क्षेत्र (electric Field) उत्पन्न हो जाता है ,उत्पन्न हुए इस विधुत क्षेत्र  की दिशा बैटरी के पॉजिटिव सिरे (Positive Terminal) से नेगेटिव सिरे (Negative terminal) की तरफ होती है। इस विधुत क्षेत्र के कारण धातु में मौजूद प्रत्येक फ्री इलेक्ट्रान विधुत क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक विधुत बल (Electric Force) का  अनुभव करता है और इस बल के कारण ये फ्री इलेक्ट्रान बल की दिशा में त्वरित (Accelerated) होते है लेकिन इस त्वरण के कारण इलेक्ट्रान का वेग लगातार (Continuous) बढ़ता नहीं है।

 इसका कारण यह है कि इलेक्ट्रान चालक में मौजूद बध्द धनायनों से टकराते रहते है। इलेक्ट्रानो का यह टक्कर अप्रत्यास्थ होती है तथा प्रत्येक टक्कर में बैटरी द्वारा प्राप्त उनकी गतिज ऊर्जा कम हो जाती है और यह ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है। 

अंत में ये सभी इलेक्ट्रान विधुत क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक नियत वेग से गति करने लगते है। चालक के सिरों के बीच आरोपित विभवांतर फ्री इलेक्ट्रानो को त्वरित नहीं कर पाते है बल्कि उन्हें चालक के लम्बाई के समान्तर ,विधुत क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक नियत गति प्रदान करते है। इलेक्ट्रान के इस एक दिशा में नियत (Constant) गति को अनुगमन वेग (Drift Velocity) कहते है। 

किसी चालक के अंदर फ्री इलेक्ट्रान विधुत क्षेत्र के प्रभाव में एक नियत औसत वेग से एक दिशा में प्रवाहीत होते है। इस नियत औसत एक दिशीय (Unidirectional) वेग को Drift Velocity कहते है। ड्रिफ्ट वेग को Vdसूचित किया जाता है।  

प्रति एकांक विधुत क्षेत्र में इलेक्ट्रान के अनुगमन वेग (Drift Velocity) को इलेक्ट्रानो की गतिशीलता (Mobility) कहते है। दूसरे शब्द में कहे तो इलेक्ट्रान की गतिशीलता से यह मालूम होता है की चालक के अंदर फ्री इलेक्ट्रान विधुत क्षेत्र के कारण कितनी तेजी से घूम सकता है। जिस चालक की mobility जितनी अधिक होती है उसकी चालकता उतनी ही अधिक होती है। इलेक्ट्रान की Mobility को  μ से सूचत किया जाता है।  

 यदि चालक के अंदर विधुत क्षेत्र की तीव्रता E हो तथा इलेक्ट्रानो का अनुगमन वेग V(Drift Velocity) हो तो

Drift Velocity of free electron
Drift Velocity का मान बहुत ही कम  होता है। यह लगभग 10-4 के बराबर या इसके रेंज में होता है जो की तापीय वेग से बहुत ही कम है लेकिन इस वेग के कारण चालक में आवेश का नेट प्रवाह होता है जिससे चालक में विधुत धारा का प्रवाह होता है। इस प्रकार चालक में विधुत धारा का प्रवाह होता है। 

Drift Velocity तथा Current Density में संबंध (Relation Between Current Density and Drift Current )  

किसी चालक से प्रवाहित विधुत धारा की प्रबलता चालक के Cross Sectional Area में से प्रति सेकंड गुजरने वाले विधुत आवेश से ज्ञात की जाती है। माना की किसी चालक के सिरों पर विभवांतर आरोपित करने से चालक के अंदर स्थापित विधुत क्षेत्र की तीव्रता E है। चालक में मौजूद फ्री इलेक्ट्रान इस विधुत क्षेत्र के विपरीत दिशा में अपने ऊपर एक विधुत बल का अनुभव करेंते है और Drift Velocity से चलने लगते है। यदि चालक के Cross Section से t सेकंड में निकलने वाले आवेश का परिमाण q कूलंब है तो चालक से प्रवाहित विधुत धारा i ऐम्पियर में 
i  = q /t 
माना की अनुप्रस्थ का क्षेत्रफल A है तथा चालक के अंदर इलेक्ट्रान घनत्व n है। चूँकि इलेक्ट्रानो का अनुगमन वेग Vहै इसलिए एक सेकंड में चालक के अनुप्रस्थ क्षेत्रफल से गुजरने वाले इलेक्ट्रान की संख्या nAVd होगी। इस प्रकार चालक से t सेकंड में गुजरने वाले इलेक्ट्रान की संख्या nAVd t होगी। यदि एक इलेक्ट्रान का आवेश e है तो चालक से t सेकंड गुजरने वाले कुल आवेश का परिमाण q हो तो  
q = nAVd t e 
अगर हम चालक से प्रवाहित विधुत धारा की गणना करे तो 
i = q/t 
       i = nAVd  e  
ऊपर दिया गया समीकरण किसी चालक से प्रवाहित विधुत धारा तथा Drift Velocity का संबंध बताता है।  चालक के एकांक क्षेत्रफल से प्रवाहित विधुत धारा को धारा घनत्व (Current Density) कहते है। माना की Current Density J है तो  

J = i /A

J = neVd
यह धारा घनत्व तथा अनुगमन वेग के बीच एक संबंध है। 

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