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माइक्रोकंट्रोलर : परिभाषा , प्रकार , कार्य सिद्धांत तथा उपयोग - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

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Microcontroller in hindi

माइक्रोकंट्रोलर क्या है ?

माइक्रोकंट्रोलर (Microcontroller) को एक छोटा सा कंप्यूटर के रूप में समझा जा सकता है  यह  किसी डिवाइस के दिमाग के रूप में काम करता है। यह एक इंटीग्रेटेड सर्किट(IC) है जिसमें एक सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU), मेमोरी, इनपुट-आउटपुट (I/O) पिन तथा अन्य दूसरे उपकरण शामिल होते हैं। माइक्रोकंट्रोलर  सबसे पहले सेंसर से डेटा पढ़ता है उसके बाद प्रोसेसर के माध्यम से निर्देशों (Instruction) को चलाता है और परिणामों के आधार पर डिवाइस को नियंत्रित करता है।
दूसरे शब्दों में, एक माइक्रोकंट्रोलर किसी उपकरण को आटोमेटिक रूप से चलाने का ज़रिया है। यह उपकरण को निर्देश देता है कि कब चालू होना है, कब बंद होना है और किस तरह से काम करना है। जैसे उदाहरण के लिए, एक वॉशिंग मशीन में माइक्रोकंट्रोलर होता है जो वॉश साइकल के विभिन्न चरणों को नियंत्रित करता है। यह पानी भरने, धोने, धुलाने और सुखाने के लिए समय और तापमान को निर्धारित करता है।

माइक्रोकंट्रोलर के प्रकार 

माइक्रोकंट्रोलर को विभिन्न कारकों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जैसे 

आर्किटेक्चर के आधार पर (Based On Architecture)

CISC (Complex Instruction Set Computers): ये माइक्रोकंट्रोलर अधिक जटिल निर्देशों(Complex Instruction) को प्रोसेस करते हैं और आम तौर पर तेज होते हैं। उदाहरण के लिए, Intel 8051, Motorola 68HC11
RISC (Reduced Instruction Set Computers): ये माइक्रोकंट्रोलर सरल निर्देशों (Simple Instruction) को प्रोसेस करते है।  उदाहरण के लिए, ARM Cortex-M, MIPS

मेमोरी के आधार पर(Based On Memory)

फ्लैश-आधारित: ये माइक्रोकंट्रोलर अपने प्रोग्राम को फ्लैश मेमोरी में स्टोर करते हैं, जो गैर-वाष्पशील होता है और बिजली कटने पर भी डेटा को बचाता है।
RAM-आधारित: ये माइक्रोकंट्रोलर अपने प्रोग्राम को रैम मेमोरी में स्टोर करते हैं, जो वाष्पशील होता है और बिजली कटने पर डेटा खो देता है।

प्रदर्शन के आधार पर(Based On Working)

लो-एंड: ये माइक्रोकंट्रोलर कम जटिल कार्यों के लिए उपयोग किये जाते हैं तथा ये सस्ते होते हैं। जैसे लिए, PIC16F84A, ATtiny85
मिड-रेंज: ये माइक्रोकंट्रोलर अधिक जटिल कार्यों को संभालने के लिए बनाये जाते हैं और शक्तिशाली होते हैं। जैसे , STM32F4, ESP32
हाई-एंड: ये माइक्रोकंट्रोलर हाई परफॉरमेंस के लिए उपयोग किए जाते  हैं और बहुत शक्तिशाली होते हैं। जैसे  लिए, ARM Cortex-A7, Renesas RX66T

माइक्रोकंट्रोलर कार्य कैसे करता है ? 

माइक्रोकंट्रोलर को एक छोटे से कंप्यूटर के रूप में समझा जा सकता है जिसमे निम्न कॉम्पोनेन्ट लगे हुए होते है। इनके बारे में जानने के बाद ही माइक्रोकंट्रोलर के कार्य सिद्धान को समझा जा सकता है :

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU):

यह माइक्रोकंट्रोलर का दिमाग होता है जो निर्देशों को प्रोसेस  करता है और इससे जुड़े हुए  उपकरण को बताता है कि क्या करना है।

मेमोरी

यह डेटा और निर्देशों (Data & Instruction) को स्टोर करता है और इसी डाटा और इंस्ट्रक्शन को CPU प्रोसेस करता है। 

इनपुट/आउटपुट (I/O) पिन

ये पिन माइक्रोकंट्रोलर को बाहरी कॉम्पोनेन्ट को जुड़ने की अनुमति देते हैं। सेंसर से डेटा इनपुट पिन के माध्यम से प्रवेश करता है तथा माइक्रोकंट्रोलर आउटपुट पिन के माध्यम से डिवाइस को नियंत्रित करता है।

परिधीय उपकरण

ये अतिरिक्त इकाइयां हैं जो माइक्रोकंट्रोलर की कार्यक्षमता को बढाती हैं,जैसे कि A /D कनवर्टर, टाइमर, और संचार इंटरफेस

डेटा इनपुट

सेंसरऔर अन्य उपकरणों से डेटा इनपुट पिन के माध्यम से माइक्रोकंट्रोलर में प्रवेश करता है। जैसे की वॉशिंग मशीन में सेंसर पानी के स्तर, तापमान और टाइमर की स्थिति के बारे में डेटा माइक्रोकंट्रोलर भेजता है।

प्रोसेसिंग

CPU डेटा को प्राप्त करता है और इसे मेमोरी में संग्रहीत निर्देशों के साथ तुलना करता है। फिर यह निर्देशों के आधार पर निर्णय लेता है कि क्या करना है।

आउटपुट

माइक्रोकंट्रोलर आउटपुट पिन के माध्यम से उपकरणों को नियंत्रित करता है। उदाहरण के लिए, वॉशिंग मशीन का माइक्रोकंट्रोलर पानी के वाल्व को खोलने, मोटर को चालू करने और हीटर को चालू करने जैसे निर्देश भेजता है।

फीडबैक लूप

माइक्रोकंट्रोलर लगातार सेंसरों से डेटा प्राप्त करता है और आउटपुट को नियंत्रित करता है। यह एक फीडबैक लूप बनाता है जो सुनिश्चित करता है कि उपकरण वांछित तरीके से काम कर रहा है।

माइक्रोकंट्रोलर का उपयोग 

माइक्रोकंट्रोलर का उपयोग विभिन्न प्रकार के उपकरण में किया जाता है जिनमे से कुछ निचे दिए गए है : 
  • मोबाइल फोन
  • घरेलू उपकरण
  • रिमोट कंट्रोल खिलौना 
  • औद्योगिक मशीन
माइक्रोकंट्रोलर का उपयोग करना आसान है क्योंकि इसमें पहले से ही कई तरह के कार्य करने के लिए प्रोग्राम लिखे हुए होते हैं। आप खुद का लिखा हुआ प्रोग्राम इसमें डालकरअपना कार्य करा सकते है। 

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