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Neutral Meaning in Hindi : परिभाषा ,प्रकार तथा उपयोग - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

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 न्यूट्रल क्या होता है?

थ्री फेज सिस्टम में प्रवाहित होने वाली विधुत धारा परिपथ में घूमते हुए पुनः विधुत श्रोत में वापस लौट जाती है। विधुत परिपथ में वह पॉइंट जहा से विधुत धारा पुनः विधुत श्रोत में वापस लौटता है उस बिंदु को न्यूट्रल पॉइंट कहा जाता है। जिस वायर या चालक से न्यूट्रल पॉइंट को जोड़ा जाता है उसे न्यूट्रल वायर या न्यूट्रल चालक कहा जाता है। सिंगल फेज ए०सी सर्किट में न्यूट्रल वायर का उपयोग विधुत परिपथ से विधुत धारा को पुनः वापस श्रोत तक पहुचाने के लिए किया जाता है। इसलिए इसे सिंगल फेज Two वायर सिस्टम (L-N) कहा जाता है। 
थ्री फेज ए०सी सिस्टम सर्किट में वह बिंदु जहा पर तीनो फेज से प्रवाहित हो रही विधुत धारा का सदिश योग शून्य हो उस बिंदु को न्यूट्रल पॉइंट कहा जाता है। 

 थ्री फेज में सप्लाई में तीनो फेज के करंट का योग शून्य क्यों होता है?

थ्री फेज सिस्टम में तीनो फेज को दो प्रकार से आपस में कनेक्ट किया जाता है।ये दो प्रकार के कनेक्शन निम्न है :
  • स्टार कनेक्शन 
  • डेल्टा कनेक्शन
थ्री फेज सप्लाई सिस्टम में प्रवाहित होने वाली विधुत धाराए एक दुसरे से 120 डिग्री से आउट ऑफ़ फेज होती है। इसका मतलब यह हुआ की यदि किसी क्षण किसी फेज में I एम्पियर की विधुत धारा प्रवाहित हो रही है तब उसी क्षण दुसरे फेज में (-I ) एम्पियर की विधुत धारा प्रवाहित हो रही होती है और तीसरे फेज में  शून्य धारा (I =0)एम्पियर की विधुत धारा प्रवाहित होती है। तीनो फेज में यह प्रक्रिया लगातार आवर्त रूप से बदलता रहता है। इसलिए किसी भी क्षण थ्री फेज के संतुलन की अवस्था में तीनो फेज के विधुत धाराओ का सदिश योग शून्य होता है। इसका का सीधा सा मतलब यह होता है की किसी भी दो फेज में विधुत धारा श्रोत से न्यूट्रल के तरफ जाती है तब तीसरा फेज न्यूट्रल बिंदु से दूर ले जाता है। 

हमारे घर में न्यूट्रल कैसे बनता है?

हमारे घरों में विधुत धारा सिंगल फेज के रूप में आता है। विधुत परिपथ को पूरा करने के लिए इस विधुत धारा को पुनः वापस विधुत श्रोत में वापस जाना भी होगा। इसलिए सिंगल फेज सप्लाई के साथ एक न्यूट्रल वायर भी आता है। हमारे घरों में प्रवाहित होने वाली विधुत धारा इस न्यूट्रल वायर से होते हुए पुनः दुबारा श्रोत में चली जाती है। 

हमारे घर में विधुत धारा 240 V पर  थ्री फेज स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर से आती है। इस थ्री फेज ट्रांसफार्मर को डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर कहा जाता है। यह एक स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर होता है जिसकी प्राइमरी वाइंडिंग डेल्टा तथा सेकेंडरी वाइंडिंग स्टार कनेक्शन में जुडा हुआ होता है। इस ट्रांसफार्मर के प्राइमरी वाइंडिंग को 11000 V सप्लाई से जोड़ा जाता है। यह 11000 V स्टेप डाउन होकर सेकेंडरी वाइंडिंग टर्मिनल पर 230 V या 240 V पर मिलता है। तीनो फेज में विधुत वोल्टेज का परिमाण 230 या 240 वोल्ट होता है लेकिन ये तीनो एक दुसरे से 120 डिग्री आउट ऑफ़ फेज होते है। ट्रांसफार्मर के सेकेंडरी वाइंडिंग के स्टार पॉइंट को न्यूट्रल पॉइंट कहा जाता है जिसे एक वायर से जोड़कर तीनो फेज के साथ चौथे वायर के रूप में भेजा जाता है। किसी भी उपभोगता को एक फेज तथा न्यूट्रल वायर से सप्लाई दे दिया जाता है। यह न्यूट्रल वायर विधुत धारा के वापसी के लिए विधुत परिपथ तैयार करता है। 

न्यूट्रल कितने प्रकार का होता है?

सामान्यतः एक प्रकार का न्यूट्रल होता है। लेकिन कभी कभी जरुरत के हिसाब से न्यूट्रल बनाना पड़ता है। इसलिए न्यूट्रल को दो प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है :-
  • सामान्य न्यूट्रल 
  • कृत्रिम न्यूट्रल 

सामान्य न्यूट्रल क्या होता है?

जब तीन वाइंडिंग के तीन फेज के तीनो टर्मिनल को आपस में जोड़ा जाता है। तब जिस बिंदु पर ये तीनो मिलते है वह बिंदु एक न्यूट्रल पॉइंट बनाता है जिसे  सामान्य न्यूट्रल बिंदु कहते है। इस बिंदु पर संतुलन की अवस्था में तीनो फेज के विधुत धारा का सदिश योग शून्य होता है। जैसे की निचे के चित्र में दिखाया गया है। यहाँ बिंदु N न्यूट्रल पॉइंट बनाता है। 
star connection

कृत्रिम न्यूट्रल क्या होता है?

कभी कभी डेल्टा कनेक्शन में जुड़े हुए थ्री फेज सप्लाई सिस्टम से ,सिंगल फेज बल्ब को जलाना पड़ता है। चूँकि डेल्टा कनेक्शन में कोई न्यूट्रल पॉइंट नहीं होता है इसलिए थ्री फेज के साथ बल्ब को जलाने के लिए एक न्यूट्रल पॉइंट बनाना पड़ता है। इस न्यूट्रल पॉइंट को कृत्रिम न्यूट्रल पॉइंट कहा जाता है। इसके तीन सामान वैल्यू वाले प्रतिरोध को स्टार में जोड़कर ,डेल्टा कनेक्शन के साथ जोड़ देते है। इस प्रकार बने हुए स्टार कनेक्शन से हमें एक न्यूट्रल पॉइंट मिल जाता है और जिसके साथ बल्ब को जोडकर आसानी से जलाया जा सकता है। 

न्यूट्रल को अर्थिंग क्या होता है तथा यह क्यों किया जाता है?

थ्री फेज सिस्टम में स्टार कनेक्शन के न्यूट्रल पॉइंट को एक बाहरी चालक के मदद से धरती के साथ जोड़ दिया जाता है। इस प्रकार न्यूट्रल को जोड़ने की प्रक्रिया न्यूट्रल अर्थिंग कहलाती है। जब थ्री फेज से किसी थ्री फेज लोड को जोड़ा जाता है तब तब संतुलन की अवस्था में न्यूट्रल पॉइंट का वोल्टेज शून्य होता है  तथा इससे कोई विधुत धारा प्रवाहित नहीं होता है। संतुलन की अवस्था में तीनो फेज में सामान परिमाण का विशुत धारा प्रवाहित होता है। जब थ्री फेज से जुडा हुआ लोड असंतुलित होता है तब तीनो फेज प्रवाहित होने वाली विधुत धारा का परिमाण बदल जाता है। जिससे न्यूट्रल पॉइंट का वोल्टेज बढ़ जाता है और इससे विधुत धारा का प्रवाह होने लगता है।

जब इस न्यूट्रल पॉइंट को धरती से जोड़ दिया जाता है तब यह वांछित विधुत धारा धरती में चली जाती है और विधुत लोड में किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती है। यदि इस न्यूट्रल पॉइंट को अर्थिंग नहीं किया जायेगा तब यह विधुत धारा लोड कको हानि पंहुचा सकती है। 

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