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Gas Power Plant In Hindi : परिचय ,कार्य सिध्दांत तथा दक्षता - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

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 गैस टरबाइन प्लांट क्या है?

सोलर प्लांट को छोड़ दिया जाए तो दुनिया में जितने भी प्रकार के प्लांट है सभी में विधुत उर्जा उत्पादन के लिए अल्टरनेटर का उपयोग किया जाता है और इस अल्टरनेटर को घुमाने के लिए बाहर से प्राइम मुभर की जरुरत पड़ती है। अर्थात पॉवर प्लांट में विधुत उर्जा उत्पादन के लिए सबसे पहले प्राइम मुभर की व्यवस्था की जाती है जिससे अल्टरनेटर को चलाया जाए। गैस टरबाइन प्लांट में उच्च ताप और दाब पर हवा का उपयोग ,अल्टरनेटर को घुमाने के लिए किया जाता है। गैस टरबाइन प्लांट की कार्य विधि बिलकुल स्टीम पॉवर प्लांट के सामान ही होता है लेकिन दोनों में जो मुख्य अंतर होता है वो यह है की स्टीम प्लांट में उच्च दाब पर संपीडित स्टीम (भाप ) का उपयोग अल्टरनेटर को घुमाने के लिए किया जाता है जबकि गैस टरबाइन में उच्च दाब पर संपीडित गैस का उपयोग अल्टरनेटर को घुमाने के लिए किया जाता है। 

गैस टरबाइन प्लांट कैसे कार्य करता है?

गैस टरबाइन प्लांट में सबसे पहले वायु को एक कंप्रेसर द्वारा उच्च दाब पर संपीडित किया जाता है तत्पश्चात इसे एक Combustion चैम्बर में भेजा जाता है। इस चैम्बर में इंधन के जलने से उष्मीय उर्जा उत्पन्न होती है जिसके मदद से एक निश्चित दाब पर कंप्रेस्ड गैस को गर्म किया जाता है जिससे इस गैस का आयतन बढ़ने लगता है जिसके परिणाम स्वरुप गैस की गतिज उर्जा बढ़ने लगती है जो किसी भी इंजन को गति देने के लिए पर्याप्त होती है। गैस प्लांट में कम्प्रेसर तथा टरबाइन अल्टरनेटर के शाफ़्ट से जुडा हुआ होता है। जब उच्च गति से वायु चलती है तब वह अल्टरनेटर को घुमाने लगती है जिससे विधुत ऊर्जा का उत्पादन होने लगता है। टरबाइन से निकलने वाली उच्च गतिज उर्जा वाली वायु को वातावरण में छोड़ दिया जाता है। इस प्रकार के गैस टरबाइन को ओपन साइकिल गैस टरबाइन कहते है। 

इस प्लांट में गैस टरबाइन अल्टरनेटर तथा कंप्रेसर दोनों को घुमाते रहता है। कभी कभी इस कार्य के लिए दो अलग अलग टरबाइन का उपयोग भी किया जाता है जिसमें उच्च दाब वाले टरबाइन से कंप्रेसर तथा निम्न दाब वाले टरबाइन से अल्टरनेटर को घुमाया जाता है। दो टरबाइन उपयोग करने का लाभ यह है की अल्टरनेटर को घुमाने वाली टरबाइन के गति को सिंक्रोनस स्पीड के नियत गति पर बनाये रखा जा सकता है जबकि कंप्रेसर को घुमाने वाली टरबाइन के गति को आउटपुट के जरुरत के हिसाब से मेन्टेन किया जा सकता है। अगर दोनों एक ही टरबाइन द्वारा संचालित किये जाते है तब यह संभव नहीं था। 
गैस टरबाइन प्लांट में कंप्रेसर तथा वातावरण के दाब का अनुपात 5:1 होता है अर्थात कंप्रेसर वायु को बाहरी दाब के तुलना में 5 गुना संपीडित करता है। Combustion चैम्बर का आंतरिक तापमान 1600 डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है। इतने ज्यादा तापमान वाली गैस को टरबाइन में सीधे नहीं भेजा जाता है क्योकि इससे टरबाइन के ब्लेड को नुकसान पहुच सकता है। इससे लगभग 800 डिग्री सेल्सियस पर टरबाइन को भेजा जाता है। 

ओपन साइकिल गैस टरबाइन की दक्षता 

ओपन साइकिल गैस टरबाइन की दक्षता बहुत ही कम होती है। इसकी मुख्य वजह यह है की 65% मैकेनिकल पॉवर का उपयोग कंप्रेसर को घुमाने में खर्च हो जाता है। इसके अतिरिक्त ज्वलन चैम्बर से निकलने वाली गैस का तापमान 1600 डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है जिसे 800 डिग्री सेल्सियस के बराबर तक कम किया जाता है। जिससे इस प्लांट की दक्षता बहुत ही कम हो जाती है। ओपन साइकिल गैस टरबाइन की दक्षता लगभग 20 प्रतिशत के बराबर होती है। 

ओपन साइकिल गैस टरबाइन की दक्षता को कैसे बढाया जा सकता है ?

इस प्लांट की दक्षता को बढ़ाने के लिए इसके बनावटी संरचना में कुछ परिवर्तन करना पड़ेगा जिससे उर्जा की जो मात्रा बर्बाद होती है उसका उपयोग दुबारा किया जा सके। इसके लिए निम्न काम किये जा सकते है :
  • पुनः उत्पादन (Regeneration)
  • अन्तः शीतलन (Intercooling)
  • पुनः उष्मीयन (Reheating)

Regeneration क्या है?

ओपन साइकिल टरबाइन से जो गैस बाहर निकलती है उसमे बहुत ही ज्यादा उष्मीय उर्जा होती है जिसे वायुमंडल में छोड़ने से बर्बाद हो जाती है। इस उष्मीय उर्जा को जब  कंप्रेसर तथा Combustion चैम्बर के बीच प्रवाहित होने वाली वायु के साथ मिला दिया जाता है तब यह उष्मीय उर्जा बर्बाद नहीं होती है जिससे टरबाइन की दक्षता थोड़ी से बढ़ जाती है। इस व्यवस्था को ही Regeneration कहते है। 

Intercooling क्या है?

कम्प्रेशन के दौरान कंप्रेस्ड एयर से उष्मीय उर्जा को बाहर निकालना Intercooling कहलाता है। इससे प्लांट के आंतरिक भाग में खपत होने वाली उष्मीय उर्जा में कमी आती है। इसके लिए पानी से भरे हुए पाइप का उपयोग किया जाता है। 

Reheating  क्या है?

कम्प्रेसर से निकले हुए कम दाब वाली वायु को टरबाइन में भेजने से पहले Combustion चैम्बर में भेजकर उसके दाब को थोडा और बढाया जाता है। इस प्रक्रिया को ही Reheating कहते है। इससे पॉवर प्लांट की दक्षता थोड़ी बढ़ जाती है। 

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Pintu Prasad
I am an Electrical Engineering graduate who has five years of teaching experience along with Cooperate experience.

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