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Thermal Power Plant In Hindi

 Thermal Power Plant एक ऐसा पावर प्लांट होता है जो कोयला में निहित उष्मीय ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। Thermal Power Plant में कोयला को जलाकर उष्मीय ऊर्जा उत्पन्न की जाती है तथा दुबारा इस उष्मीय ऊर्जा से पानी को वाष्प में बदला जाता है। 

पानी को वाष्प में बदलने का कार्य Boiler में होता है।  Boiler में उत्पन्न वाष्प का दाब जब बढ़ता तब या टरबाइन को घूमता है जिससे अल्टरनेटर जुड़ा हुआ होता है और इस अल्टरनेटर द्वारा विधुत ऊर्जा उत्पन्न होती है। अतः किसी भी थर्मल पावर के तीन महत्वपूर्ण भाग होते है जिनमे अल्टरनेटर ,बायलर तथा टरबाइन आते है। 
किसी थर्मल पावर प्लांट की दक्षता बढ़ाने या दक्षतपूर्वक कार्य करने के लिए यह जरुरी है की कोयला के जलने के बाद उत्पन्न हुए उष्मीय ऊर्जा का भरपूर उपयोग हो इसके लिए इन तीन महत्वपूर्ण भाग के अलावा अन्य कॉम्पोनेन्ट की भी जरुरत होती है। 

थर्मल पावर प्लांट में कोल हैंडलिंग पावर प्लांट का मुख्य कार्य बायलर को नियमित रूप से कोयला उपलब्ध करना। कोयला के जलने के बाद जो राख उत्पन्न होता है उसे हैंडल करने के लिए ऐश हैंडलिंग सिस्टम कार्य करती है। 

Thermal Power Plant Layout

थर्मल पावर प्लांट की बनावट बहुत ही जटिल होता है। इसके विभिन्न हिस्से में विभिन्न प्रकार के कॉम्पोनेन्ट जुड़े हुए होते  है। थर्मल पावर प्लांट से जुड़े सभी प्रकार के कॉम्पोनेन्ट को आप निचे दिए गए ब्लॉक डायग्राम से समझ सकते है। 
Thermal Power Plant


Thermal Power Plant के विभिन्न कॉम्पोनेन्ट 

टरबाइन ,जनरेटर आदि अन्य प्रकार के उपकरण  थर्मल पावर प्लांट से जुड़े हुए होते है उन्हें कॉम्पोनेन्ट  कहते है। थर्मल पावर प्लांट  जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण  निम्न है : -
  • Boiler
  • Coal Handling Plant
  • Condenser
  • Economiser
  • Alternator (Generator)
  • Pulverising Plant
  • Turbine Feed Water Heater
  • Air Preheater
  • Superheater and Reheater
  • Cooling Tower and Ponds
  • Ash Handling Plant
  • Draft System 
  • Steam Turbine 

Coal Handling Plant क्या होता है ?


कोयला किसी भी थर्मल पावर प्लांट का मुख्य ऊर्जा श्रोत होता है। इसके ही जलने के बाद उष्मीय ऊर्जा का उत्सर्जन होता है जिससे पानी को भाप में बदला जाता है। थर्मल पावर प्लांट में Coal Handling प्लांट  का मुख्य कार्य नियमित रूप से बायलर के भट्ठी को कोयल की सप्लाई करना होता है। कोयला को कोल हैंडलिंग प्लांट से भट्ठी तक ले जाने के लिए एक खाश प्रकार के बने हुए बेल्ट का प्रयोग किया जाता है। 

Pulverising Plant क्या होता है? 


हम सभी जानते है की कोयला का आकार किसी बड़े आकर के पत्थर के सामान होता है। यदि इस बड़े आकार वाले कोयला को जलाया जाए तो यह आसानी से नहीं जलेगा। अगर जल भी गया तो इसमें मौजूद पूरी ऊर्जा का दहन नहीं होगा। इसलिए पावर प्लांट के भट्ठी तक पहुंचने से पहले इन बड़े आकार वाले कोयला के टुकड़ो को तोड़कर महीन चूर्ण बना लिया जाता है जिससे इनके सतह का आकार कम हो जाता है और ये पाउडर के आकार वाले कोयला के कण आसानी से जलने लगते है। कोयला को इस प्रकार तोड़कर पाउडर बनाने का कार्य जिस प्लांट में होता है उसे Pulverising Plant कहते है। 

Draft System क्या होता है? 

जब Pulverising Plant से महीन कोयला का पाउडर ,जलने के लिए बायलर में जाता है तब इसके जलने के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में हवा की जरुरत होती है।  इसके अलावा कोयला दहन के बाद बहुत ही ज्यादा मात्रा में अन्य गैस भी उत्पन्न होता है इसलिए इन गैसों को सुचारु रूप से बाहर निकालना भी होता है। गैस का एक  दूसरे जगह ,परिचालन दाब में अंतर के कारण होता है जिसे  Draft कहते है। यदि वातारण तथा बायलर के दाब में अंतर उत्पन्न कर दिया जाये तब बायलर में कोयला को जलने के लिए प्रयाप्त मात्रा में हवा उपलब्ध करायी जा सकती है। बायलर में इस प्रकार हवा उपलब्ध कराने वाली प्रणाली को Draft System कहते है। 

Boiler क्या होता है? 

बायलर एक प्रकार का बंद वेसल होता है जिसे आमतौर पर स्टीम जनरेटर भी कहा जाता है जिसमे पानी उच्च दाब पर भाप में परिवर्तित होता है।  यह थर्मल पावर प्लांट का एक बहुत ही महत्पूर्ण भाग होता है।  बायलर को इस प्रकार से बनाया जाता है की यह Combustion चैम्बर में जलने वाले कोयला से उत्पन्न उष्मीय ऊर्जा का अधिक से अधिक अवशोषण करे जिससे पानी भाप में परिवर्तन ज्यादा मात्रा में हो। Combustion चैम्बर में उत्पन्न उष्मीय ऊर्जा का परवाह बायलर के तरफ तीन प्रकार से होता है जिसे हम Conduction ,Convection  तथा रेडिएशन विधि कहा जाता है।  बायलर मुख्य रूप से दो  प्रकार का होता है। (1). Fire Tube Boiler (2). Water Tube Boiler  

Superheater क्या होता है?

बायलर उत्पन्न हुए भाप को दुबारा ,गर्म कर सुपरहीटेड किया जाता है। सुपरहीटेड भाप ऐसा भाप होता है जिसमे संतृप्त भाप से  सामान दाब पर ज्यादा उष्मीय ऊर्जा निहित होती है। सुपरहीटेड भाप में निहित  अधिक  उष्मीय ऊर्जा  के वजह से टरबाइन को ज्यादा मात्रा में ऊर्जा मिलती है जिससे विधुत ऊर्जा का उत्पादन ज्यादा होता है। भाप को सुपरहीट करने से टरबाइन में जंग कम लगता है तथा इसके अलावा इसे बहुत ही कम ऊर्जा हानि पर ज्यादा दूर तक भेजा जा सकता है। टरबाइन से उत्पन्न भाप में निहित Moisture को ख़त्म करने के लिए Superheat किया जाता है। 

Steam Turbine क्या होता है?

स्टीम टरबाइन थर्मल प्लांट का वह भाग होता है जहा भाप में निहित उष्मीय ऊर्जा को मैकेनिकल ऊर्जा में बदला जाता है जिससे जनरेटर घूमता है। जब किसी उच्च दाब वाले द्रव्य (Fluid) को किसी किसी संकीर्ण या पतली पाइप से निकली जाती है तब इसकी गति बहुत ही ज्यादा होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर उच्च दाब पर भाप में निहित उष्मीय ऊर्जा को मैकेनिकल ऊर्जा में बदला जाता है। स्टीम टरबाइन दो प्रकार का होता है :(1) Impulse Turbine (2.) Reaction Turbine 

Ash Handling प्लांट  क्या होता है?

 थर्मल पावर प्लांट में उष्मीय ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए कोयला का उपयोग मुख्य रूप से किया जाता है। Combustion चैम्बर में कोयला के जलने के बाद बहुत ही ज्यादा मात्रा में राख उत्पन्न होता है। एक छोटे क्षमता वाले पावर प्लांट में  लगभग एक सेकंड में तीन से चार टन राख उत्पन्न होता है। इस प्रकार उत्पन हो रहे राख को नियमित रूप से हैंडल करना होता है। अगर इसमें थोड़ी सी भी चूक हुयी की पावर प्लांट बंद हो सकता है इसलिए इस रख को हैंडल करने के लिए Ash Handling प्लांट बनाया जाता है। 

Condenser क्या होता है?

Condenser का हिंदी अर्थ संघनित होना होता है। अर्थात भाप जब कम दाब पर पुनः पानी में परिवर्तित होता है तब इसे संघनित होना कहते है। पावर प्लांट में कंडेंसर का काम भी कुछ ऐसा ही होता है। पावर प्लांट के टरबाइन से उच्च दाब पर निकलने वाली भाप को बहुत ही कम दाब पर पुनः दुबारा पानी में बदलने का कार्य कंडेंसर करता है। पावर प्लांट में कंडेंसर के उपयोग से इसकी Efficiency बढ़ जाती है। कंडेंसर द्वारा भाप से बने पानी को दुबारा बायलर में  भाप बनने के लिए भेजा जाता है। 

Cooling Tower क्या होता है?

टरबाइन से निकलने वाली भाप को पानी में बदले के लिए  कंडेंसर को बहुत ही ज्यादा मात्रा में पानी की जरुरत होती है। जैसे एक किलोग्राम भाप को पानी में बदलने के लिए लगभग 100 किलोग्राम ठन्डे पानी की जरुरत होती है। 

इतने ज्यादा मात्रा में पानी के जरुरत को आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता है  क्योकि इतनी ज्यादा पानी के जरुरत को पूरा करने के लिए प्लांट के नजदीक में पानी का कोई श्रोत उपलब्ध नहीं होता है। इसलिए पावर प्लांट में एक क्लोज्ड वाटर कूलिंग सिस्टम डिज़ाइन किया जाता है जहा कंडेंसर से निकले गर्म पानी को दुबारा ठंडा कर बायलर में भेजा जाता है। पानी को इस प्रकार ठंडा करने की प्रक्रिया कलिंग टावर द्वारा किया जाता है।

कूलिंग टावर स्टील या कंक्रीट का एक हाइपरबोलिक ढाचा होता है जिसके निचले भाग में ठन्डे पानी को इकठा किया जाता है। गर्म पानी को कलिंग टावर के ऊपरी भाग में इकठ्ठा कर बून्द बून्द कर निचे गिराया जाता है। गर्म पानी की बुँदे जब हवा के संपर्क में आती है तब ठंडा हो जाती है।  

Economiser क्या होता है?

बायलर से बाहर निकलने वाली Flue गैसों के में बहुत ही ज्यादा मात्रा में उष्मीय ऊर्जा निहित होता है। Economiser इन गैसों में निहित ऊर्जा का उपयोग ,बायलर को दी जाने वाली पानी को गर्म करने में करता है। इस प्रकार भाप बनने से पहले पानी को गर्म करने से कोयला का बचत होता है। Economiser का उपयोग आजकल सभी प्रकार के थर्मल पावर प्लांट में होता है। 

Generator क्या होता है?

थर्मल पावर प्लांट में  विधुत ऊर्जा का उत्पादन जनरेटर द्वारा ही होता है। यह एक थ्री फेज सिन्क्रोनस जनरेटर होता है। इसके रोटर को शाफ़्ट के मदद से टरबाइन द्वारा जोड़ दिया जाता है। टरबाइन के घूमने की वजह से यह भी घूमता है जिससे विधुत ऊर्जा का उत्पादन होता है। 

थर्मल पावर प्लांट के लाभ तथा हानि 

लाभ 

  • थर्मल पावर प्लांट का शुरुवाती लागत अन्य पावर प्लांट के तुलना में कम होता है। 
  • थर्मल पावर प्लांट में ,हाइड्रो पावर प्लांट के तुलना में कम जमींन की जरुरत  होती है। 
  • चूँकि थर्मल पावर प्लांट में ईंधन के रूप में कोयला का उपयोग किया जाता है इसलिए अन्य ईंधन के तुलना में कोयला सस्ता होता जिससे विधुत ऊर्जा का उत्पादन लागत कम होता है। 
  • थर्मल पावर प्लांट का मेन्टेन्स आसान होता है। 
  • कैसी भी जगह जहा ज्यादा मात्रा में पानी उपलब्ध  तथा यातायात का साधन उपलब्ध हो ,थर्मल पावर प्लांट को लगाया जा सकता है। 

हानि 

  • थर्मल पावर प्लांट का रनिंग कॉस्ट बहुत ही ज्यादा होता है। 
  • कोयला जलने की वजह से ज्यादा मात्रा में धुँआ उत्पन्न होता है और इससे प्रदुषण बढ़ता है। 
  • थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली गर्म पानी की वजह से नदी में रहने वाले प्राणियों को दिक्कत होता है। 
  • थर्मल पावर प्लांट की दक्षता बहुत ही कम होता है। 



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