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एoसी वोल्टेज तथा एoसी करंट का उत्पादन कैसे होता है? - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

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एसी वोल्टेज तथा एसी करंट क्या होता है?

generation of ac voltage

AC वोल्टेज या करंट एक दिए गए समय अंतराल में अपने Polarity को लगातार बदलते रहते है। AC वोल्टेज या करंट दिए गए समय अंतराल के आधे समय अंतराल में एक दिशा में शून्य से शुरू कर एक अधिकतम वैल्यू तक बढ़ता है तथा अधिकतम वैल्यू के बाद दुबारा शून्य तक आता है तथा अगले आधे समय अंतराल में शून्य से विपरीत दिशा में अधिकतम वैल्यू तक बढ़ता है और अधिकतम वैल्यू प्राप्त करने के बाद दुबारा शून्य तक आता है। यह प्रक्रिया लगातार चलते रहता है। 

AC वोल्टेज को दो तरह से उत्पन्न किया जाता है :-

  • स्थिर मैग्नेटिक फील्ड के अंदर Coil को नियत गति से घुमाकर 
  • स्थिर Coil को एक बदलते मैग्नेटिक फील्ड में रखकर 
छोटे जनरेटर में Coil को घुमाया जाता है तथा मैग्नेटिक फील्ड को स्थिर रखा जाता है तथा उत्पन्न AC वोल्टेज को स्लिप रिंग ( Slip ring ) के मदद से बाहर निकल लिया जाता है। लेकिन बड़े जनरेटर में Coil को स्थिर रखा जाता है तथा मैग्नेटिक फील्ड को घुमाया जाता है। 

AC वोल्टेज उत्पन्न करने की प्रक्रिया 

जनरेटर में विधुत ऊर्जा का उत्पादन मैकेनिकल ऊर्जा से किया जाता है। मैकेनिकल ऊर्जा का इलेक्ट्रिकल ऊर्जा में रूपांतरण फैराडे के Electromagnetic Induction  सिद्धांत के अनुसार होता है। 

जिसके अनुसार यदि एक Coil तथा चुंबकीय क्षेत्र  के बीच सापेक्षिक गति (Relative Motion) हो तो Coil में एक Emf उत्पन्न हो जाता है। यदि यह गति Angular नेचर का हो तो Coil में उत्पन्न हुआ EMF भी Angular नेचर का होगा। 

विधुत जनरेटर में मैग्नेटिक फील्ड को स्टेटर में उत्पन्न किया जाता है तथा Coil को रोटर पर रखकर ,रोटर को किसी बाहरी मशीन (External Mover) से घुमाया जाता है। 

जब रोटर से जुड़ा हुआ Coil चुंबकीय क्षेत्र को काटता है तब  इसके दोनों टर्मिनलों के बीच एक EMF Induced हो जाता है। जब इस दोनों टर्मिनलो को स्लिपरिंग के मदद से किसी लोड के साथ जोड़ा जाता है तब इसमें एक विधुत धारा चलने लगती है जो Alternating होती है। 

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