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Electrical Law In Hindi

सम्पूर्ण इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कुछ बेसिक नियम पर आधारित है। इस पोस्ट के माध्यम से हम इन  नियमो  को आसान भाषा में समझने की कोशिश करेंगे। ये सभी नियम इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्तम्भ है। इन नियमो को बिना समझे हम इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के कुछ हिस्सों को नहीं समझ पाएंगे। 

(1)किरचॉफ का नियम 

यह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का एक बेसिक लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण नियम है। इसके अंतर्गत दो नियम आते है। आप इस नियम को पढ़ने के लिए यहाँ विजिट कर सकते है। 

(2) ओम का नियम 

relation between voltage and current

यह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण नियम है। इसके अनुसार यदि किसी चालक के दोनों सिरों के बीच कोई विभवांतर(Potential Difference) आरोपित किया जाता है तो इस चालक में एक विधुत धारा चलने लगता है। यदि इस चालक को एक समदैशिक माध्यम (Isotropic medium) अर्थात (जिस माध्यम का तापमान ,दाब  न बदले ) में रखे तो इसमें चलने वाली विधुत धारा आरोपित विभवांतर के समानुपाती होता है।  
माना की आरोपित विभवांतर = V volt 
चलने वाली विधुत धारा = I amp 
ओम के नियमानुसार 
>  I ∝ V 
>  V  ∝ I 
>  V =IR 
जहाँ R एक नियतांक (Constant)है। इसे चालक का प्रतिरोध(Resistance) कहते है। 

> R =  V /I 
प्रतिरोध एक भौतिक राशि है। इस एसआई मात्रक ओम होता है। 

(3)फैराडे का नियम 

जब चुम्बकीय क्षेत्र तथा चालक के बीच सापेक्षिक गति (Relative Motion) होता है तब चालक के दोनों सिरों के बीच एक EMF उत्पन्न हो जाता है। जब इन सिरों के बीच किसी लोड को जोड़ा जाता है तब लोड में एक विधुत धारा चलने लगता है। इस नियम के अनुसार विधुत  जनरेटर बनाया जाता है। 
(सापेक्षिक गति का मतलब ,चालक तथा चुंबकीय क्षेत्र  दोनों में से कोई एक गति में हो )

(4)लेंज़ का नियम 

इस नियम के अनुसार चुम्बकीय क्षेत्र तथा चालक के बीच सापेक्षिक गति से जो EMF उत्पन होता है वह हमेशा उसे उत्पन्न करने वाले कारक का विरोध करता है। 

(5) बायो -सेवार्ट का नियम 

यह नियम किसी चालक से चलने वाली विधुत धारा तथा उसके चारो तरफ उत्पन्न होने वाली चुम्बकीय क्षेत्र के बीच सम्बन्ध को दर्शाता है। इस नियम के अनुसार किसी चालक के समीप किसी बिंदु पर  उत्पन्न होने वाला मैग्नेटिक फील्ड के तीव्रता का मान निम्न कारको पर निर्भर करता है :-

माना की चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B है। 

यह चालक के प्रवाहीत होने वाली विधुत धारा के समानुपाती होता है 

अर्थात   B ∝ I ---(1)

यह चालक के स्वल्पांश (Δl) की लम्बाई के समानुपाती होता है 
अर्थात   B ∝ Δl  ---(2)

यह स्वल्पांश तथा चुम्बकीय क्षेत्र  के बिंदु के मिलाने वाली रेखा के बीच के कोण (φ) के Sin के समानुपाती होता है।अर्थात   B ∝ Sinφ  ---(3)
यह चुम्बकीय क्षेत्र के बिंदु तथा स्वल्पांश के बीच  के दुरी (R)के व्युत्क्रमानुपाती होता है
  B ∝ 1/R2
ऊपर के तीनों समीकरणों को मिलाने पर

B = K( IΔ LSinΦ)/R2

 जहाँ K स्थिरांक (Constant)है। 

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