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X-Rays की पूरी जानकारी हिंदी - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

X-Rays की खोज?

X-ray in hindi

सन 1895 में जर्मन वैज्ञानिक Rontgen ने एक Experiment में  देखा की जब तीव्र वेग से चलने वाली कैथोड किरणे किसी अधिक परमाणु भार तथा उच्च द्रवणांक वाली धातु के टुकड़े से टकराती है तो धातु  सतह से एक नई प्रकार के किरणे उत्पन्न होती है जो नग्न आँखो से दिखाई तो नहीं देती है परन्तु फोटोग्राफी प्लेट पर वैसे ही प्रभाव डालती है जैसे अन्य किरणे डालती है। 

Rontgen ने इन अज्ञात किरणों का नाम X-Rays रखा। इस महत्वपूर्ण खोज के लिए Rontgen को 1901 का नावेल पुरस्कार दिया गया। Rontgen के सम्मान में कभी कभी इन किरणों को Rontgen Ray भी कहा जाता है।

X-Rays का उत्पादन कैसे किया जाता है?

सन 1913 में डॉ कुलिज ने X-Rays को प्रायोगिक रूप से उपयोग करने के लिए, X-Rays उत्पादन हेतु एक प्रकार के Tube का अविष्कार किया जिसे कूलिज Tube कहते है। आजकल कूलिज Tube से X-Rays का उत्पादन किया जाता है। डॉ कुलिज द्वारा बनाया गया कूलिज Tube को नीचे  चित्र में दिखाया गया है। 

इसमें कठोर कांच का एक गोलाकार बल्ब होता है जिसके अंदर लगभग सेमी का High वैक्यूम होता है।इसमें दो नालियां लगी रहती है। एक नली में टंगस्टन धातु का फिलामेंट F होता है जिसे एक बैटरी B द्वारा जोड़कर विधुत धारा प्रवाहित की जाती है। 
X-Rays in hindi

जब यह फिलामेंट गर्म होता है तब तापायनिक प्रभाव (Heating Effect of Electric Current) के कारण इलेक्ट्रान उत्सर्जित होने लगते है। इन इलेक्ट्रान की संख्या फिलामेंट के तापमान पर निर्भर करती है। फिलामेंट F के चारो तरफ मोलिबडेनम का एक बेलन C होता है जिसे फिलामेंट के सापेक्ष में नेगेटिव वोल्टेज पर रखा जाता है। 

फिलामेंट F के सामने कॉपर का एक ब्लॉक होता है जो इलेक्ट्रान पुंज के पथ से 45 डिग्री कोण पर झुका रहता है।इस ब्लॉक के तल पर मॉलीबॉडेनम या टंगस्टन जैसी उच्च द्रवणांक तथा अधिक परमाणु भार वाली धातु का का एक टुकड़ा लगा रहता है। इसे टारगेट कहते है।

 कॉपर का ब्लॉक एक कॉपर के खोखली नली के सिरे पर स्थित होता है। इस नली में ठंडा जल प्रवाहीत किया जाता है। पूरी नलिका सीसे के एक खोल से घिरी होती है। 

कूलिज Tube की कार्य विधि 

जब एक Step Up ट्रांसफार्मर द्वारा फिलामेंट F तथा टारगेट T के बीच लगभग 20 हज़ार का Voltage Difference आरोपित करते है तब फिलामेंट से निकलने वाले इलेक्ट्रान तीव्र वेग से जाकर टारगेट T से टकराते है जिससे X-Rays निकलने लगती है।

 इलेक्ट्रॉनों के Target  लगातार टकराने से Target T बहुत गर्म हो जाता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनों के कुल ऊर्जा का केवल लगभग 0.3% भाग ही X-Rays उत्पन्न करने में खर्च होता है शेष ऊर्जा उष्मीय ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।

 यदि उत्पन्न हुए इस उष्मीय ऊर्जा को हटाया नहीं गया तो कुछ समय बाद टारगेट पिघल जायेगा। इसी वजह से टारगेट के चारो तरफ ताम्बे के नाली में जल प्रवाहीत की जाती है। X-Rays को उत्पन्न होने के लिए यह आवश्यक है की फिलामेंट से निकलने वाले इलेक्ट्रान, टारगेट पर पहुंचने से पहले नलिका में मौजूद गैस  परमाणुओं से टकराये न।

 इस वजह से नलिका अंदर हाई वैक्यूम रखा जाता है। यदि ऐसी व्यवस्था नहीं की गयी तो इलेक्ट्रान गैस  परमाणुओं  टकरा कर अपनी ऊर्जा खो देंगे और गैस के परमाणु भी आयनित जायेंगे और इस प्रकार उत्पन्न हुए धन आयन (Positive Charge) फिलामेंट की ओर आकर्षित होकर फिलामेंट से टकरा जायेंगे।  

X-Rays के गुण (Properties of X-Rays)

  • ये दिखाई नहीं देती है। 
  • ये सीधी रेखा  चलती है। 
  • ये प्रकाश (Light) के वेग से चलती है। 
  • इनमे परावर्तन,अपवर्तन ,व्यतिकरण ध्रुवण तथा विवर्तन होता है। 
  • इनकी तरंगदैर्घ्य प्रकाश  अपेक्षा बहुत कम होता है। 
  • ये विधुत क्षेत्र (Electric Field) तथा चुम्बकीय क्षेत्र(Magnetic Field) में विक्षेपित नहीं होती है। 
  • ये किसी प्रतिदीप्त पदार्थ पर पड़ने से चमक उत्पन्न करती है। 
  • ये जिस भी गैस से गुजरती उसे आयनीकरण(Ionisation) कर देती है।
  • इनकी वेधन क्षमता बहुत ज्यादा होती है। 
  • ये फोटोग्राफी प्लेट पर पड़कर उसे काला कर देती है। 
  • यदि ये  किसी मनुष्य के शरीर पर ज्यादा समय तक डाली गयी तो ये घातक साबित हो सकती है। 

X-Rays का उपयोग (Uses of X-Rays) 

X-Rays के विभिन्न गुण के कारण इनका उपयोग बहुत ही जगह पर किया जाता है। जैसे :-
सर्जरी में 
रेडियोथेरेपी में 
इंजीनियरिंग में 
जासूसी विभाग में 
प्रयोगशाला में 

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